Description
इनमें से कुछ पेड़ 300 फुट से भी ऊँचे होते हैं, और दुनिया के सबसे ऊँचे पेड़ों में गिने जाते हैं। तो कुछ छोटे और टेढ़े-मेढ़े भी होते हैं जो सूखी ज़मीन से ज़्यादा ऊँचे नहीं उगते। उनकी पत्तियों की कारीगरी कमाल की है। और उनके फूल तो देखने लायक हैं। आपने कभी-न-कभी ज़रूर इस पेड़ का कोई हिस्सा इस्तेमाल किया होगा।
इनमें से कुछ पेड़ों के शाही नाम हैं, ऐल्पाइन ऐश और तास्मेनियन ओक मगर इनमें से ज़्यादातर पेड़ों को आम तौर पर गोंद के पेड़ कहा जाता है। असल में देखा जाए तो गोंद एक घुलनशील पदार्थ है और कार्बोहाइड्रेट्स से बना होता है। मगर यूकेलिप्टस की किसी भी जाति से इस तरह का पदार्थ नहीं बनता। तो इस पेड़ को गोंद का पेड़ कहना गलत होगा। लेकिन इस प्रजाति का सही नाम होगा यूकेलिप्टस जिसे सफेदा या नीलगिरि का पेड़ भी कहा जाता है और इस प्रजाति में 600 से भी ज़्यादा जातियाँ हैं जो ऑस्ट्रेलिया में पायी जाती हैं।
उन्नीसवीं सदी में जब लोग बड़ी तादाद में यूरोप से आकर ऑस्ट्रेलिया में बसने लगे तो इनसे यूकेलिप्टस पेड़ को भारी नुकसान पहुँचा। अनुमान लगाया गया है कि 3,00,000 वर्ग किलोमीटर में फैले इन पेड़ों को जड़ से उखाड़ डाला गया क्योंकि इन्हें इंसान की प्रगति में रुकावट माना गया। लेकिन इस कीमती पेड़ के बारे में सभी की सोच ऐसी नहीं थी। उन्नीसवीं सदी के दौरान ही यूकेलिप्टस प्रजाति दुनिया-भर में मशहूर होने लगी।








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